राधास्वामी सम्वत् 202
अर्ध-शतक 99      रविवार   जून 07, 2020     अंक 26      दिवस 6

सतसंग के उपदेश

भाग-3

(परम गुरु हुज़ूर साहबजी महाराज)

बचन (17)

रामायण की कथा हर कोई जानता है और इस कथा के सुनने पर हर किसी का दिल भर आता है। सतसंगियों के लिये इस कथा का सुनना व जानना तभी सफल होगा जब वे राम की तरह अपने पिता राधास्वामी दयाल के आज्ञाकारी बनने का प्रण धारण करें, और लक्ष्मण की तरह अपने सतसंगी भाइयों से प्रेम, श्रद्धा व उदारता का बर्ताव करें और हनुमान की तरह अपने इष्टदेव राधास्वामी दयाल का सच्चा भक्त बनने की कोशिश करें और आलस्य, भय, लोभ या इन्द्रियभोग के बस हो कर अपने तईं भक्तिमार्ग से पतित न होने दें।

बचन (18)

अगर सतसंगी बढ़ कर सेवा करने का मौक़ा हासिल करने की ग़रज़ से दुनिया में बड़ा दर्जा मिलने के लिये प्रार्थना व कोशिश करे तो निहायत जायज़ व दुरुस्त है। लेकिन अगर इज़्ज़त, दौलत व हुक़ूमत का रस लेने की ग़रज़ से प्रार्थना व कोशिश करे तो नाजायज़ व नामुनासिब है। जिस शख़्स को सच्चे मालिक के दर्शन सच्ची मुक्ति, और ऊँची से ऊँची रूहानी गति की प्राप्ति के लिये रास्ता मिल गया और जिसने इन बातों को अपनी ज़िन्दगी का उद्देश्य क़रार दिया उसके लिये दुनिया का रुतबा, दौलत व हुकूमत क्या हैसियत रखते हैं ? चूँकि हुज़ूर राधास्वामी दयाल ने स्वार्थ व परमार्थ दोनों के कमाने के लिये उपदेश फ़र्माया है इसलिये सतसंग में स्वार्थ के लिये गुँजायश निकल आई है वरना स्वार्थ की क्या हक़ीक़त कि सच्चे परमार्थ से आँख मिला सके। इसलिये याद रखना चाहिये कि हरचन्द सतसंगी को स्वार्थ कमाने की इजाज़त है लेकिन हर हालत में मुख्यता परमार्थ ही की रहेगी।

बचन (19)

सन्तमत में बतलाया जाता है कि सतसंगी की अन्त समय में ख़ास तरह से सँभाल होती है। बाज़ लोग सन्तमत के इस सिद्धान्त पर सख़्त ऐतराज़ करते हैं मगर वे यह भूल जाते हैं कि जन्म के वक्त़ जीवों की सँभाल के लिये भी तो मालिक की जानिब से पूरा इन्तिज़ाम है। जब बच्चा पैदा होता है तो उसकी आसायश के लिये माँ-बाप अपनी जानिब से कितनी कोशिश करते हैं हालाँकि जन्म लेने वाला बच्चा बिल्कुल अजनबी होता है। अलावा इसके जो बच्चा किसी अमीर घर में जन्म लेता है उसके लिये बमुक़ाबिले एक कंगाल के घर में जन्म लेने वाले बच्चे के कहीं बढ़कर इन्तिज़ाम रहता है। इसलिये यह समझने में कोई दिक़्क़त नहीं होनी चाहिये कि अन्त समय पर संस्कारों के फ़र्क़ की वजह से सतसंगी को आम जीवों के मुक़ाबिले ख़ास सहूलियत मिलती है।